भाजपा ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को अपना घोषणा पत्र जारी किया। इसे पार्टी ने राजस्थान गौरव संकल्प नाम दिया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इसे जारी करते हुए कहा कि उनकी सरकार बेरोजगारों को 5 हजार रुपए का भत्ता देगी। वहीं, 50 लाख नौकरियां देने का भी वादा किया। राज्य की 200 सीटों के लिए 7 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। वहीं, परिणाम 11 दिसंबर को आएंगे।
उन्होंने बताया कि हमारी सरकार ने 2013 के घोषणा पत्र के 81 प्रतिशत वादों को पूरा किया। 665 बिंदुओं में से 630 पर काम पूरा हुआ या उन पर काम चल रहा है। हमने रोजगार का वादा पूरा किया है। पिछले पांच साल में 2.25 लाख लोगों को सरकारी नौकरियां दी हैं।
किसान की आय दोगुनी की जाएगी
फसलों की लागत का डेढ़ गुना भाव मिलना सुनिश्चित करने के लिए राज्य में एमएसपी खरीद की प्रक्रिया को और ज्यादा पारदर्शी और सुदृढ़ बनाया जाएगा।
कृषि केन्द्रित 250 करोड़ रुपए का ग्रामीण स्टार्ट-अप फंड स्थापित किया जायेगा।
युवाओं के लिए 5 हजार रुपए भत्ता
21 साल से ज्यादा शिक्षित बेरोजगारों को 5 हजार रुपए प्रतिमाह का बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।
सरकारी क्षेत्र में हर साल 30 हजार सरकारी नौकरी देने के साथ-साथ पांच साल में स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में 50 लाख लोगों को रोजगार दिया जाएगा।
घोषणा पत्र की अहम बातें
हर जिले में योग भवन का निर्माण किया जायेगा।
सेना भर्ती शिविरों की नियत तिथि से 3 महीने पहले युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिये प्रत्येक उप-खण्ड पर प्रशिक्षण केंद्र खोले जायेंगे।
सभी जिलों को 4 लेन 'राजस्थान माला' हाइवे से जोड़ा जाएगा।
यूनिवर्सल हेल्थ इंश्योरेंश को भामाशाह योजना के साथ जोड़ा जाएगा
जेटली ने कहा- हमने घोषणापत्र नहीं, रोडमैप जारी किया
अरुण जेटली ने कहा कि हमने पार्टी का गौरव संकल्प पत्र जारी किया। दरअसल यह रोडमैप है। देश में जो आर्थिक प्रगति है, जब उसका विकास अधिक बढ़ता है, तो स्वाभाविक है, वो केवल एक आंकड़ा नहीं होता, उसके हर नगर में, हर शहर में, हर गांव में चिह्न दिखायी देते हैं। उससे विकास जब बढ़ता है, तो सरकार के पास राजस्व भी अधिक आता है।
Tuesday, November 27, 2018
Wednesday, November 7, 2018
दिवाली पर अंधविश्वास में कुछ लोग आज भी देते हैं उल्लू की बलि
मंत्री ने कहा कि सुल्तान, एक उल्लू दूसरे उल्लू से अपनी संतान की शादी की बात कर रहा है. दूसरा उल्लू जानना चाहता है कि दहेज में उसे कितने निर्जन गांव मिलेंगे.
मंत्री ने कहा कि उल्लू कह रहा है कि जब तक सुल्तान ज़िंदा है, निर्जन गांवों की कोई कमी नहीं है. बताते हैं कि मंत्री की इस बात का सुल्तान पर बहुत गहरा असर हुआ और उन्होंने अपनी तलवार म्यान में डाल दी.
आज भी दी जाती है उल्लुओं की बलि
उल्लू को एक ओर जहां बहुत से लोग मूर्ख मानते हैं वहीं बहुत से लोगों के लिए वो एक समझदार पक्षी है. जो लोग मांसाहारी हैं, वो भी कभी उल्लू का मांस खाने के बारे में नहीं सोचते. लेकिन दिवाली आते ही उल्लुओं की बलि का बिगुल बज उठता है.
आप मानिए या न मानिए लेकिन काली पूजा के लिए आज भी उल्लुओं की बलि दी जाती है.
इस दौरान उल्लुओं की ऊंची कीमत लगती है. तीस हज़ार का एक उल्लू. दिल्ली में तो बहुत से दुकानदार ऐसे भी मिल जाएंगे जो एक उल्लू को पचास हज़ार में बेचने की कसम खाकर दुकान में खड़े होते हैं जबकि खुद उन्होंने उस उल्लू को जयपुर या मेरठ जैसी जगहों से महज़ तीन सौ या चार सौ में ख़रीदा होता है.
मनुस्मृति को लेकर होने वाले विवाद की वजह क्या है
कौन हैं और कहां से आई हैं विनायकी माता?
तीन सौ के उल्लू की क़ीमत तीस हज़ार होने के पीछे एकमात्र कारण अंधविश्वास है. ऐसी मान्यता है कि लक्ष्मी पूजा की रात उल्लू की बलि देने से अगले साल तक के लिए धन-धान्य, सुख-संपदा बनी रहती है.
उल्लुओं की ख़रीद और बिक्री का ज़्यादातर बाज़ार राजस्थान और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है जहां 'कलंदर' उन्हें पकड़ते हैं.
ये लोग मुख्य तौर पर जयपुर, भरतपुर, अलवर और फ़तेहपुर सिकरी के अंदरूनी ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं. कोराई-करावली गांव उल्लू के गुप्त व्यापार के लिए देशभर में कुख्यात हैं. मथुरा के पास कोसी-कलां भी इसके लिए जाना जाता है.
कुछ आदिवासी, मुख्य तौर पर बहेलिया लोग छोटे उल्लुओं को पकड़ते हैं और उनका प्रजनन कराते हैं ताकि दिवाली के मौके पर उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा सके.
उस वक्त पकड़ा गया एक नन्हा उल्लू बेचे जाने तक बड़ा हो चुका होता है. उल्लू के शरीर के हर हिस्से की अपनी क़ीमत होती है. चाहे वो चोंच हो, उसके पंजे हों, उसकी खोपड़ी हो, आंख हो चाहे उसका मांस. उसके शरीर के हर हिस्से का इस्तेमाल तांत्रिक पूजा के लिए किया जाता है.
अंधविश्वास की हदें
अमावस्या की रात को होने वाली तांत्रिक पूजा में कुछ लोग उल्लू की बलि देते हैं.
जो शख़्स पूजा करता है, उसे तथाकथित काले जादू में दक्षता रखने वाला कोई तांत्रिक दिशा-निर्देश देता रहता है. उसे शारीरिक संबंध नहीं बनाना होता है, शरीर पर मौजूद सभी अनचाहे बालों को हटाना होता है और मध्यरात्रि में नहाना होता है.
उसके बाद उसे एक सफ़ेद धोती लपेटनी होती है लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा नग्न ही रखना होता है. इसके बाद उस शख़्स को आंखें बंद करके बैठ जाना होता है.
सामने बैठा तांत्रिक मंत्रों का जाप शुरू करता है. तांत्रिक क्रियाएं अलग-अलग तरह की होती हैं. कभी किसी लड़की (जिसे अभी-अभी पीरियड्स होने शुरू हुए हैं) के इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड को उल्लू के चारों ओर लपेटकर जलाया जाता है तो कभी किसी नव-विवाहित महिला के पेटिकोट (साड़ी के अंदर पहने जाना वाला वस्त्र) से.
माना जाता है कि अगर कोई महिला उत्सुकतावश इसकी झलक भी देख लेगी तो वो ज़िदगीभर के लिए बांझ हो जाएगी और अगर कोई बच्चा इस तांत्रिक क्रिया को देख लेता है तो वो अकाल मौत मर जाएगा.
मुग़लों ने भी दी थी बलि?
उत्तर प्रदेश के इब्राहिमपट्टी में जन्मे इब्राहिम भाई के अनुसार, उल्लू की बलि से बहुत से तांत्रिक क्रियाएं जुड़ी हुई हैं. उल्लू वैभव की देवी लक्ष्मी का वाहन है और लोग जल्द से जल्द पैसा कमाना चाहते हैं ऐसे में लोग वो सबकुछ करते हैं जो तांत्रिक उन्हें करने को कहता है.
राजस्थान के धौलपुर के एक पुराने बाशिंदे का दावा है कि जिस समय मुग़ल वंश ख़त्म हो रहा था उस दौरान भी उल्लुओं का बलि दिए जाने से जुड़े कुछ सुबूत मिलते हैं.
वो मोहम्मद शाह रंगीला और उनसे भी पहले मइज़ुद्दीन जहांदार शाह और मोहम्मद फर्रुकसेयर का ज़िक्र इस संबंध में करते हैं. वो लाल कंवर का ज़िक्र करते हुए बताते हैं, वो शुरू में विवाहित नहीं थीं लेकिन आगे चलकर जहांदार शाह ने उन्हें बेगम इम्तियाज़ महल बना दिया और उनके भी पीरियड्स के दौरान के कपड़ों का इस्तेमाल तंत्र के लिए किया गया था.
मंत्री ने कहा कि उल्लू कह रहा है कि जब तक सुल्तान ज़िंदा है, निर्जन गांवों की कोई कमी नहीं है. बताते हैं कि मंत्री की इस बात का सुल्तान पर बहुत गहरा असर हुआ और उन्होंने अपनी तलवार म्यान में डाल दी.
आज भी दी जाती है उल्लुओं की बलि
उल्लू को एक ओर जहां बहुत से लोग मूर्ख मानते हैं वहीं बहुत से लोगों के लिए वो एक समझदार पक्षी है. जो लोग मांसाहारी हैं, वो भी कभी उल्लू का मांस खाने के बारे में नहीं सोचते. लेकिन दिवाली आते ही उल्लुओं की बलि का बिगुल बज उठता है.
आप मानिए या न मानिए लेकिन काली पूजा के लिए आज भी उल्लुओं की बलि दी जाती है.
इस दौरान उल्लुओं की ऊंची कीमत लगती है. तीस हज़ार का एक उल्लू. दिल्ली में तो बहुत से दुकानदार ऐसे भी मिल जाएंगे जो एक उल्लू को पचास हज़ार में बेचने की कसम खाकर दुकान में खड़े होते हैं जबकि खुद उन्होंने उस उल्लू को जयपुर या मेरठ जैसी जगहों से महज़ तीन सौ या चार सौ में ख़रीदा होता है.
मनुस्मृति को लेकर होने वाले विवाद की वजह क्या है
कौन हैं और कहां से आई हैं विनायकी माता?
तीन सौ के उल्लू की क़ीमत तीस हज़ार होने के पीछे एकमात्र कारण अंधविश्वास है. ऐसी मान्यता है कि लक्ष्मी पूजा की रात उल्लू की बलि देने से अगले साल तक के लिए धन-धान्य, सुख-संपदा बनी रहती है.
उल्लुओं की ख़रीद और बिक्री का ज़्यादातर बाज़ार राजस्थान और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है जहां 'कलंदर' उन्हें पकड़ते हैं.
ये लोग मुख्य तौर पर जयपुर, भरतपुर, अलवर और फ़तेहपुर सिकरी के अंदरूनी ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं. कोराई-करावली गांव उल्लू के गुप्त व्यापार के लिए देशभर में कुख्यात हैं. मथुरा के पास कोसी-कलां भी इसके लिए जाना जाता है.
कुछ आदिवासी, मुख्य तौर पर बहेलिया लोग छोटे उल्लुओं को पकड़ते हैं और उनका प्रजनन कराते हैं ताकि दिवाली के मौके पर उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा सके.
उस वक्त पकड़ा गया एक नन्हा उल्लू बेचे जाने तक बड़ा हो चुका होता है. उल्लू के शरीर के हर हिस्से की अपनी क़ीमत होती है. चाहे वो चोंच हो, उसके पंजे हों, उसकी खोपड़ी हो, आंख हो चाहे उसका मांस. उसके शरीर के हर हिस्से का इस्तेमाल तांत्रिक पूजा के लिए किया जाता है.
अंधविश्वास की हदें
अमावस्या की रात को होने वाली तांत्रिक पूजा में कुछ लोग उल्लू की बलि देते हैं.
जो शख़्स पूजा करता है, उसे तथाकथित काले जादू में दक्षता रखने वाला कोई तांत्रिक दिशा-निर्देश देता रहता है. उसे शारीरिक संबंध नहीं बनाना होता है, शरीर पर मौजूद सभी अनचाहे बालों को हटाना होता है और मध्यरात्रि में नहाना होता है.
उसके बाद उसे एक सफ़ेद धोती लपेटनी होती है लेकिन शरीर का ऊपरी हिस्सा नग्न ही रखना होता है. इसके बाद उस शख़्स को आंखें बंद करके बैठ जाना होता है.
सामने बैठा तांत्रिक मंत्रों का जाप शुरू करता है. तांत्रिक क्रियाएं अलग-अलग तरह की होती हैं. कभी किसी लड़की (जिसे अभी-अभी पीरियड्स होने शुरू हुए हैं) के इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड को उल्लू के चारों ओर लपेटकर जलाया जाता है तो कभी किसी नव-विवाहित महिला के पेटिकोट (साड़ी के अंदर पहने जाना वाला वस्त्र) से.
माना जाता है कि अगर कोई महिला उत्सुकतावश इसकी झलक भी देख लेगी तो वो ज़िदगीभर के लिए बांझ हो जाएगी और अगर कोई बच्चा इस तांत्रिक क्रिया को देख लेता है तो वो अकाल मौत मर जाएगा.
मुग़लों ने भी दी थी बलि?
उत्तर प्रदेश के इब्राहिमपट्टी में जन्मे इब्राहिम भाई के अनुसार, उल्लू की बलि से बहुत से तांत्रिक क्रियाएं जुड़ी हुई हैं. उल्लू वैभव की देवी लक्ष्मी का वाहन है और लोग जल्द से जल्द पैसा कमाना चाहते हैं ऐसे में लोग वो सबकुछ करते हैं जो तांत्रिक उन्हें करने को कहता है.
राजस्थान के धौलपुर के एक पुराने बाशिंदे का दावा है कि जिस समय मुग़ल वंश ख़त्म हो रहा था उस दौरान भी उल्लुओं का बलि दिए जाने से जुड़े कुछ सुबूत मिलते हैं.
वो मोहम्मद शाह रंगीला और उनसे भी पहले मइज़ुद्दीन जहांदार शाह और मोहम्मद फर्रुकसेयर का ज़िक्र इस संबंध में करते हैं. वो लाल कंवर का ज़िक्र करते हुए बताते हैं, वो शुरू में विवाहित नहीं थीं लेकिन आगे चलकर जहांदार शाह ने उन्हें बेगम इम्तियाज़ महल बना दिया और उनके भी पीरियड्स के दौरान के कपड़ों का इस्तेमाल तंत्र के लिए किया गया था.
Subscribe to:
Comments (Atom)
肺炎疫情:新冠病毒之下,韩国人这样继续坚持上课
我走进河老师的英语课教室时,学校的铃声正好响起 唐宁街说, 色情性&肛交集合 因感染新冠病毒住院 色情性&肛交集合 并重症监护的 色情性&肛交集合 首相约翰逊当 色情性&肛交集合 地时间12日中午出院。 色情性&肛交集合 此前, 色情性&肛交集合 约逊发表声明, 色情性&肛...
-
我走进河老师的英语课教室时,学校的铃声正好响起 唐宁街说, 色情性&肛交集合 因感染新冠病毒住院 色情性&肛交集合 并重症监护的 色情性&肛交集合 首相约翰逊当 色情性&肛交集合 地时间12日中午出院。 色情性&肛交集合 此前, 色情性&肛交集合 约逊发表声明, 色情性&肛...
-
أقر واحد من أبرز المستشارين الاقتصاديين للرئيس الأمريكي ، دونالد ترامب، بأن الأخير أخطأ، بقرار فرض رسوم جمركية على الصادرات الصينية إلى بلا...
-
火车迷阿布舍克·贾斯瓦尔(Abhishek Jaiswal) 随后发布视频原素材。他说原始视频拍摄于去年12月,用于他在Youtube的火车主题频道。 在贾斯瓦尔的原始视频里,同一辆火车的运行速度要慢得多。 而戈亚尔在推特官方账号上发布视频,并配文称赞这是“‘印度制造’计...