中国和越南都在南海修建人工岛,但美国之音报道说,中国造岛受到的关注和批评超过了越南的造岛行动,因为越南的造岛进度慢,而且被许多人认为是防御性质。
越南在其控制了数十年而且距离大陆最近的岛礁上进行扩建。澳大利亚新南威尔士大学的塞耶(Carl Thayer)教授对BBC越南语记者说,中国清楚越南在南沙群岛的建造工程,但到目前为止还没有公开发声。
不过塞耶教授说,中国对菲律宾在中业岛上的建设作出更强烈的反应。他认为同菲律宾总统向中国示好相比,越南的做法更正确,这样才能捍卫自己的主权。
本月初“亚洲海事透明倡议”发布报告说,越南从2017年开始就在大约10个主要的岛屿上修建各种设施,包括在南沙群岛越南占据的最大岛屿上修建了一个体育场,而且把一个750米长的飞机跑道延长到1300米。
南沙群岛被越南军方控制了数十年的岛屿上的建造工程包括填海,建筑上安装太阳能板。报告还说,越南在有时候处于水下的礁石和沙滩上修建了25个停泊港。
新南威尔士大学的塞耶教授说,2002年中国同东盟签订行为行为准则宣言,各方承诺在南海停止夺取占领岛礁的行为。但在宣言签署之前,越南就占有南沙群岛(越南称“长沙群岛”)的一些岛礁。
胡志明大学的国际关系系主任阮忠(Trung Nguyen)说,越南在建造抵御恶劣天气的填海工程进展比较缓慢,工程一般避免使用大型船只,以避免吸引国际注意。
塞耶教授说,“亚洲海事透明倡议”的报告提到的2015以后越南在南沙群岛建岛工程可能会引起其他国家效仿去填海建岛。但他说中国在南海的大片地区扩建搞军事化,相比之下,其他国家的建造微不足道,越南在南沙群岛的建设工程不能同中国的规模相提并论。
“亚洲海事透明倡议”项目负责人波林(Gregory Poling)说,越南的岛礁扩建工程的目的是增加中国夺取这些岛礁的难度。他说,越南的目的是让岛上的设施能够长期存在,要中国人在夺取这些岛礁时付出更多代价。
他还说,在海上中国一般不会强力对付越南,因为越南人受到逼迫,敢于同中国舰船“碰撞挤压”。
中国建岛引起警惕
外部观察认为,越南没有像中国那样进行大规模造岛工程,另外越南是地区组织东盟的成员。因此越南在南海的建造工程并没有引起如对中国的填海造岛那样的外部反应。
中国官员虽然同东盟有交流,但并没有定期同东盟领导人,国防部长和外交部长会谈的机制。新加坡国际事务研究所的胡逸山认为,东盟国家不会彼此开战,因为东盟国家能够找到共识。
新加坡南洋理工大学拉惹勒南国际研究院的副教授张嘉松也认为,东盟成员国决不会彼此对抗。他认为这是东盟内部的共识,即在南海的申索国不会破坏面对中国"威胁"的共同利益。
中国声称拥有南海有争议海域90%的主权,包括许多越南和其他几个国家认为属于他们的海域。文莱,马来西亚,菲律宾和台湾都在南海有主权申索。中国的填海造岛工程特别令越南紧张,因为中国控制了南海的西沙群岛 ,而河内对西沙群岛和南沙群岛的三个大岛都有主权要求。
“亚洲海事透明倡议”的报告认为,中国的造岛工程包括为军用飞机和雷达建造的大批基础设施。2016年美国国防部的评估认为,中国填海获得1294公顷的土地面积,加强了对岛礁和环礁的控制。
因为中国和菲律宾对越南控制的南海岛屿也有主权要求,因此他们多年来多次对越南提出抗议,反对他们的填海造岛工程。但这些抗议并没有引起多大反响,学者认为越南并没有被视为多大的威胁。
越南还得到日本和美国的支持,他们都希望能遏制中国的扩张。拉惹勒南国际研究院的张嘉松说,日本在2014年决定向越南捐赠6艘海岸巡逻艇,帮助越南提高军事投送能力。美国军舰也定期在南海巡航,对中国发出警示。
Wednesday, April 24, 2019
Thursday, April 18, 2019
研究:服降胆固醇药物 一半患者没见效原因复杂
他汀类药物(英文名statins)是西方最常见的降胆固醇处方药。在美国,大约有四分之一40岁以上成年人服用它。英国服用该药的患者人数也高达数百万。
然而最近有研究显示,在服用这种降胆固醇药物的人群中,只有大约一半人效果明显(达到把坏胆固醇降到40%以上),另外一半服药者则看不到效果。
英国研究人员调查了16万5千名服药者,发现两个人中就有一人服药后效果不佳。换句话说并没有把他们的坏胆固醇降低多少。
人体中坏胆固醇(也叫低密度胆固醇,LDL)过高容易增加心脏病风险。
研究人员并不肯定为什么statins对有些人作用显著,而对另外一些人却没有什么效果。
但是,他们不建议患者在没有经过医生的同意后就自行停药。
可能原因
专家认为,一个可能的解释是有些人没有按时服药,或是医生给他们开的药量过低。
每年,英国有15万人死于心血管疾病。坏胆固醇过高是其中的主要原因之一,因为它可以导致血管栓塞。
虽然少吃饱和脂肪可以帮助降低坏胆固醇,但有些人还是需要服药。这就是为什么有许多人服用降胆固醇药的原因。
但专家表示,这一研究结果有其局限性,因为他们无法证明那些服用statins药效不显著的患者结局就一定会很糟糕。
此外,一些其它因素,比如吸烟和肥胖也会增加心血管疾病的风险。
值得注意的一点是,在那些服用statins药物效果不理想的患者当中,很大一部分人服用的剂量都比较低。而那些效果显著的患者往往服用的剂量较高。
英国诺丁汉大学的研究人员表示,希望未来能够找到更好的途径了解服药者之间的差异,然后更有效地对症治疗,而不是简单地统一用药。
但慈善机构“英国心脏基金会”的专家梅廷•阿夫基兰教授( Metin Avkiran )表示,statins仍然是目前被证明降低胆固醇最有效的重要治疗方法。它有减少致命性突发心脏病或是中风的可能性。
因此,专家建议如果你已经遵医嘱服用statins的话,就应该继续按时服药。但如果你对此有任何担心的话,则请你与家庭医生探讨对策。
现在也有一些其它可以帮助降低胆固醇的药物,也许它更适合你,或是两者一起服用。
英国皇家全科医师学会主席海伦·斯托克斯-兰帕德(Helen Stokes-Lampard)表示,最重要的是患者应该尊医嘱服药,这样才能令他们最大获益。
她补充道,有大量的研究显示他汀类药物statins对大多数人来说是安全和有效的。如果服药适量,它可以减少心脏病和中风的危险。
当然,围绕statins的安全和其潜在的副作用一直存在争议。
“患者选择不服用处方药的原因很复杂,而围绕他汀类药物的不同看法可能就是其中原因之一,”斯托克斯-兰帕德说。
然而最近有研究显示,在服用这种降胆固醇药物的人群中,只有大约一半人效果明显(达到把坏胆固醇降到40%以上),另外一半服药者则看不到效果。
英国研究人员调查了16万5千名服药者,发现两个人中就有一人服药后效果不佳。换句话说并没有把他们的坏胆固醇降低多少。
人体中坏胆固醇(也叫低密度胆固醇,LDL)过高容易增加心脏病风险。
研究人员并不肯定为什么statins对有些人作用显著,而对另外一些人却没有什么效果。
但是,他们不建议患者在没有经过医生的同意后就自行停药。
可能原因
专家认为,一个可能的解释是有些人没有按时服药,或是医生给他们开的药量过低。
每年,英国有15万人死于心血管疾病。坏胆固醇过高是其中的主要原因之一,因为它可以导致血管栓塞。
虽然少吃饱和脂肪可以帮助降低坏胆固醇,但有些人还是需要服药。这就是为什么有许多人服用降胆固醇药的原因。
但专家表示,这一研究结果有其局限性,因为他们无法证明那些服用statins药效不显著的患者结局就一定会很糟糕。
此外,一些其它因素,比如吸烟和肥胖也会增加心血管疾病的风险。
值得注意的一点是,在那些服用statins药物效果不理想的患者当中,很大一部分人服用的剂量都比较低。而那些效果显著的患者往往服用的剂量较高。
英国诺丁汉大学的研究人员表示,希望未来能够找到更好的途径了解服药者之间的差异,然后更有效地对症治疗,而不是简单地统一用药。
但慈善机构“英国心脏基金会”的专家梅廷•阿夫基兰教授( Metin Avkiran )表示,statins仍然是目前被证明降低胆固醇最有效的重要治疗方法。它有减少致命性突发心脏病或是中风的可能性。
因此,专家建议如果你已经遵医嘱服用statins的话,就应该继续按时服药。但如果你对此有任何担心的话,则请你与家庭医生探讨对策。
现在也有一些其它可以帮助降低胆固醇的药物,也许它更适合你,或是两者一起服用。
英国皇家全科医师学会主席海伦·斯托克斯-兰帕德(Helen Stokes-Lampard)表示,最重要的是患者应该尊医嘱服药,这样才能令他们最大获益。
她补充道,有大量的研究显示他汀类药物statins对大多数人来说是安全和有效的。如果服药适量,它可以减少心脏病和中风的危险。
当然,围绕statins的安全和其潜在的副作用一直存在争议。
“患者选择不服用处方药的原因很复杂,而围绕他汀类药物的不同看法可能就是其中原因之一,”斯托克斯-兰帕德说。
Wednesday, March 13, 2019
इस साल 43 देशों में चुनाव: सैन मरीनो ऐसा देश, जहां हर छह महीने में दो राष्ट्राध्यक्ष चुने जाते हैं
नई दिल्ली. इस साल भारत समेत दुनिया के 43 देशों में आम चुनाव हैं। मतदाताओं की संख्या के लिहाज से भारत दुनिया में नंबर-1 है। यहां 90 करोड़ मतदाता हैं। वहीं, इंडोनेशिया में भी इस साल अप्रैल में चुनाव होंगे। वहां मतदाताओं की संख्या 19 करोड़ है। अफ्रीकी देश नाइजीरिया में इस साल 8.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके हैं। नाइजीरिया में जितने कुल वोटर हैं, भारत ने उतने नए मतदाता पिछले 5 साल में जोड़े हैं। वहीं, इटली के पास स्थित सैन मरीनो ऐसा देश है जहां हर छह महीने में चुनाव होते हैं और दो राष्ट्राध्यक्ष चुने जाते हैं। सैन मरीनो में यह व्यवस्था 776 साल से चली आ रही है।
चुनावों के तरीके
अलग-अलग देशों में मतदाता तीन तरह से अपने नेता का चुनाव करते हैं-
पहला : राष्ट्रपति का चुनाव, जहां लोग सीधे राष्ट्राध्यक्ष या राष्ट्रपति चुनते हैं।
दूसरा : संसदीय प्रणाली, जिसमें लोगों द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि शासनाध्यक्ष या प्रधानमंत्री का चुनाव करते हैं। भारत में यही प्रणाली है।
तीसरा : जिसमें राष्ट्राध्यक्ष के साथ-साथ राज्य के प्रतिनिधियों का भी चुनाव होता है।
2019 में इन प्रमुख देशों में चुनाव
18 वर्ष की उम्र पूरी होने पर इन देशों में मताधिकार
भारत, अफगानिस्तान, अल्बानिया, अलजीरिया, अंगोला, एंटीगुआ, अर्मेनिया, ऑस्ट्रेलिया, अजरबैजान, बहामास, बांग्लादेश, बारबाडोस, बेलारूस, बेल्जियम, बोलीविया, बोस्निया और हर्जेगोविना, बोत्सवाना, बुल्गारिया, बुरुंडी, कंबोडिया, कनाडा, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, चाड, चिली, कोलंबिया, कोस्टारिका, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेमनार्क, जिबूती, डोमिनिका, डोमिनिकन गणराज्य, इजिप्ट, अल सल्वाडोर, एस्टोनिया, फिजी, फिनलैंड, फ्रांस, गबोन, जार्जिया, जर्मनी, घाना, ग्रीस, ग्वाटेमाला, गुआना, हैती, होंडुरास।
हंगरी, आइसलैंड, ईरान, इराक, आयरलैंड, इजराइल, इटली, जमैका, जापान, जार्डन, कजाकस्तान, केन्या, कोसोवो, किर्गीस्तान, लाओस, लातविया, लिबेरिया, लीबिया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, उत्तरी मेसेडोनिया, मैडागास्कर, मलावी, मालदीव, माली, मार्शल द्वीपसमूह, मॉरिशस, मैक्सिको, मालदोवा, मंगोलिया, मोरक्को, मोजांबिक, म्यांमार, नामीबिया, नेपाल, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नाइगर, नाइजीरिया, नॉर्वे, पाकिस्तान, फिलिपींस, पनामा, पापुआ न्यू गिनी, पराग्वे, पेरू, फिलिस्तीन, पोलैंड, पुर्तगाल।
कांगो गणराज्य, रोमानिया, रूस, रवांडा, सैन मरीनो, सेनेगल, सर्बिया, सेशल्स, सिएरालोन, स्लोवाकिया, स्लोवानिया, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, श्रीलंका, सेंट लूसिया, सूडान, सूरीनाम, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, सीरिया, ताजिकिस्तान, तंजानिया, थाइलैंड, गांबिया, टोगो, त्रिनिदाद व टोबैगो, ट्यूनीशिया, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, यूगांडा, उक्रेन, उज्बेकिस्तान, उत्तरी अमेरिका, ब्रिटेन, यूराग्वे, वेनेजुएला, वियतनाम, जांबिया, जिम्बॉब्वे।
न्यूजीलैंड में 126 सालों से महिलाओं को मताधिकार
1893 में न्यूजीलैंड विश्व में पहला ऐसा देश बना जहां महिलाओं को भी मताधिकार मिला। 1950 में दुनिया के दो तिहाई देशों में सभी वयस्कों को मताधिकार मिल चुका था। 1971 में स्विट्जरलैंड अंतिम यूरोपीय देश बना, जिसने महिलाओं को मताधिकार प्रदान किया। इसी तरह 1994 में रंगभेद के खात्मे के बाद दक्षिण अफ्रीका, अफ्रीकी महाद्वीप का अंतिम प्रजातांत्रिक देश बना, जहां सभी वयस्कों को मताधिकार मिला। अफगानिस्तान अकेला ऐसा देश है, जहां महिलाओं को मताधिकार से कई बार वंचित किया जा चुका है। हालांकि, वहां 2004 से लगातार महिलाओं का मताधिकार बना हुआ है।
चुनाव कब-कब
यूं तो तकरीबन सभी देशों में चुनाव 4 या 5 वर्षों के अंतराल में होते हैं। हालांकि, महज 33,000 की आबादी वाला सैन मरीनो अकेला ऐसा देश है जहां हर 6 माह में चुनाव होता है।
चुनाव हर तीन वर्षों में : ऑस्ट्रेलिया, फिजी, नाउरू, न्यूजीलैंड
चुनाव हर 4 वर्षों में : अल्बेनिया, अर्जेंटीना, बोस्निया व हर्जेगोविना, ब्राजील, बुल्गारिया, चिली, कोलंबिया, कोस्टारिका, डोमिनिक गणराज्य, इक्वाडोर, इजिप्ट, एस्टोनिया, फिनलैंड, जर्मनी, घाना, ग्वाटेमाला, होंडुरास, हंगरी, आइसलैंड, ईरान, इराक, इजराइल, जापान, कोसोवो, लातविया, लेबनान, उत्तर मेसेडोनिया, माल्टा, मार्शल द्वीपसमूह, मोल्दोवा, मंगोलिया, नीदरलैंड, नाइजीरिया, नॉर्वे, फिलिस्तीन, पुर्तगाल, सर्बिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, थाइलैंड, तिमोर-लेस्त, टोंगा, उक्रेन, उत्तर अमेरिका
चुनाव प्रत्येक 5 वर्षों में : भारत, अफगानिस्तान, अलजीरिया, अंगोला, एंटीगुआ, अर्मेनिया, ऑस्ट्रेलिया, बहामास, बांग्लादेश, बारबडोस, बेलारुस, बेिल्जयम, बोलीविया, बोत्सवाना, बुरुंडी, कंबोडिया, कनाडा, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, चाड, कोमोरोस, क्रोएशिया, क्यूबा, साइप्रस, चेक गणराज्य, जिबूती, डोमिनिका, अल सल्वाडोर, एट्रिशिया, इथोपिया, फ्रांस, जार्जिया, गिनी, हैती, इंडोनेशिया, आयरलैंड, इटली, जमैका, कजाकस्तान, कीनिया, लाओस, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, मेडागास्कर, मलावी, मॉरिशिआना, मॉरिशस, मालदीव, मोरक्को, मोजाम्बीक, म्यामार, नामीबिया, नेपाल, निकारागुआ, निगर, पाकिस्तान, पनामा, पापुआ न्यू गिनी, पराग्वे, पेरू, पोलैंड, कांगो गणराज्य, रोमानिया, समोआ, सेनेगल, सेशल्स, सिएरा लोन, सिंगापुर, स्लोवाकिया, स्लोवानिया, सोमालिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, दक्षिण सूडान, सूरीनाम, श्रीलंका, सेंट किट्स, सेंट लूसिआ, सूडान, तंजानिया, गांबिया, टोगो, त्रिनिदाद व टोबैगो,
एक कार्यकाल : अर्मेनिया, बारबाडोस, बेिल्जयम, बुलगारिया, कोलंबिया, अल सल्वाडोर, फ्रांस, ग्वाटेमाला, होंडुरास, हंगरी, आइसलैंड, आयरलैंड, इजराइल, जमैका, जापान, कोसोवो, किर्गीस्तान, लाओस, लेबनान, मलेशिया, माल्टा, मॉरिशस, मैक्सिको, मोरक्को, पैराग्वे, फिलिपींस, सर्बिया, दक्षिण कोरिया, सेंट लूसिया, तुर्की, उक्रेन
दो कार्यकाल : अमेरिका, अफगानिस्तान, अल्जीरिया, अंगोला, एंटीगुआ, बोस्निया और हर्जेगोविना, बोत्सवाना, ब्राजील, बुरुंडी, कंबोडिया, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कोमोरोस, क्रोएशिया, क्यूबा, चेक गणराज्य, डोमिनिका, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वाडोर, इजिप्ट, एरिट्रिया, फिजी, घाना, गयाना, हैती, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, कजाकस्तान, केन्या, किरिबाती, लाइबेरिया, लिथुआनिया, मैडागास्कर, मलावी, मॉरितानिया, मॉल्दोवा, मोजांबिक, म्यामार, नामीबिया, नाउरू, नेपाल, निगर, नाइजीरिया, फिलिस्तीन, पनामा, पेरू, पोलैंड, कांगो गणराज्य, रोमानिया, रूस, रवांडा, सेनेगल, सेशल्स, सिएरा लियोन, सिंगापुर, स्लोवाकिया, स्लोवानिया, सोमालिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण सूडान, सूडान, सूरीनाम, ताजिकिस्तान, तंजानिया, थाइलैंड, गांबिया, त्रिनिदाद व टोबैगो, तुर्कमेनिस्तान, ट्यूनीशिया, उत्तरी अमेरिका, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, जांबिया, जिंबाब्वे।
चुनावों के तरीके
अलग-अलग देशों में मतदाता तीन तरह से अपने नेता का चुनाव करते हैं-
पहला : राष्ट्रपति का चुनाव, जहां लोग सीधे राष्ट्राध्यक्ष या राष्ट्रपति चुनते हैं।
दूसरा : संसदीय प्रणाली, जिसमें लोगों द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि शासनाध्यक्ष या प्रधानमंत्री का चुनाव करते हैं। भारत में यही प्रणाली है।
तीसरा : जिसमें राष्ट्राध्यक्ष के साथ-साथ राज्य के प्रतिनिधियों का भी चुनाव होता है।
2019 में इन प्रमुख देशों में चुनाव
18 वर्ष की उम्र पूरी होने पर इन देशों में मताधिकार
भारत, अफगानिस्तान, अल्बानिया, अलजीरिया, अंगोला, एंटीगुआ, अर्मेनिया, ऑस्ट्रेलिया, अजरबैजान, बहामास, बांग्लादेश, बारबाडोस, बेलारूस, बेल्जियम, बोलीविया, बोस्निया और हर्जेगोविना, बोत्सवाना, बुल्गारिया, बुरुंडी, कंबोडिया, कनाडा, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, चाड, चिली, कोलंबिया, कोस्टारिका, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेमनार्क, जिबूती, डोमिनिका, डोमिनिकन गणराज्य, इजिप्ट, अल सल्वाडोर, एस्टोनिया, फिजी, फिनलैंड, फ्रांस, गबोन, जार्जिया, जर्मनी, घाना, ग्रीस, ग्वाटेमाला, गुआना, हैती, होंडुरास।
हंगरी, आइसलैंड, ईरान, इराक, आयरलैंड, इजराइल, इटली, जमैका, जापान, जार्डन, कजाकस्तान, केन्या, कोसोवो, किर्गीस्तान, लाओस, लातविया, लिबेरिया, लीबिया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, उत्तरी मेसेडोनिया, मैडागास्कर, मलावी, मालदीव, माली, मार्शल द्वीपसमूह, मॉरिशस, मैक्सिको, मालदोवा, मंगोलिया, मोरक्को, मोजांबिक, म्यांमार, नामीबिया, नेपाल, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नाइगर, नाइजीरिया, नॉर्वे, पाकिस्तान, फिलिपींस, पनामा, पापुआ न्यू गिनी, पराग्वे, पेरू, फिलिस्तीन, पोलैंड, पुर्तगाल।
कांगो गणराज्य, रोमानिया, रूस, रवांडा, सैन मरीनो, सेनेगल, सर्बिया, सेशल्स, सिएरालोन, स्लोवाकिया, स्लोवानिया, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, श्रीलंका, सेंट लूसिया, सूडान, सूरीनाम, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, सीरिया, ताजिकिस्तान, तंजानिया, थाइलैंड, गांबिया, टोगो, त्रिनिदाद व टोबैगो, ट्यूनीशिया, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, यूगांडा, उक्रेन, उज्बेकिस्तान, उत्तरी अमेरिका, ब्रिटेन, यूराग्वे, वेनेजुएला, वियतनाम, जांबिया, जिम्बॉब्वे।
न्यूजीलैंड में 126 सालों से महिलाओं को मताधिकार
1893 में न्यूजीलैंड विश्व में पहला ऐसा देश बना जहां महिलाओं को भी मताधिकार मिला। 1950 में दुनिया के दो तिहाई देशों में सभी वयस्कों को मताधिकार मिल चुका था। 1971 में स्विट्जरलैंड अंतिम यूरोपीय देश बना, जिसने महिलाओं को मताधिकार प्रदान किया। इसी तरह 1994 में रंगभेद के खात्मे के बाद दक्षिण अफ्रीका, अफ्रीकी महाद्वीप का अंतिम प्रजातांत्रिक देश बना, जहां सभी वयस्कों को मताधिकार मिला। अफगानिस्तान अकेला ऐसा देश है, जहां महिलाओं को मताधिकार से कई बार वंचित किया जा चुका है। हालांकि, वहां 2004 से लगातार महिलाओं का मताधिकार बना हुआ है।
चुनाव कब-कब
यूं तो तकरीबन सभी देशों में चुनाव 4 या 5 वर्षों के अंतराल में होते हैं। हालांकि, महज 33,000 की आबादी वाला सैन मरीनो अकेला ऐसा देश है जहां हर 6 माह में चुनाव होता है।
चुनाव हर तीन वर्षों में : ऑस्ट्रेलिया, फिजी, नाउरू, न्यूजीलैंड
चुनाव हर 4 वर्षों में : अल्बेनिया, अर्जेंटीना, बोस्निया व हर्जेगोविना, ब्राजील, बुल्गारिया, चिली, कोलंबिया, कोस्टारिका, डोमिनिक गणराज्य, इक्वाडोर, इजिप्ट, एस्टोनिया, फिनलैंड, जर्मनी, घाना, ग्वाटेमाला, होंडुरास, हंगरी, आइसलैंड, ईरान, इराक, इजराइल, जापान, कोसोवो, लातविया, लेबनान, उत्तर मेसेडोनिया, माल्टा, मार्शल द्वीपसमूह, मोल्दोवा, मंगोलिया, नीदरलैंड, नाइजीरिया, नॉर्वे, फिलिस्तीन, पुर्तगाल, सर्बिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, थाइलैंड, तिमोर-लेस्त, टोंगा, उक्रेन, उत्तर अमेरिका
चुनाव प्रत्येक 5 वर्षों में : भारत, अफगानिस्तान, अलजीरिया, अंगोला, एंटीगुआ, अर्मेनिया, ऑस्ट्रेलिया, बहामास, बांग्लादेश, बारबडोस, बेलारुस, बेिल्जयम, बोलीविया, बोत्सवाना, बुरुंडी, कंबोडिया, कनाडा, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, चाड, कोमोरोस, क्रोएशिया, क्यूबा, साइप्रस, चेक गणराज्य, जिबूती, डोमिनिका, अल सल्वाडोर, एट्रिशिया, इथोपिया, फ्रांस, जार्जिया, गिनी, हैती, इंडोनेशिया, आयरलैंड, इटली, जमैका, कजाकस्तान, कीनिया, लाओस, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, मेडागास्कर, मलावी, मॉरिशिआना, मॉरिशस, मालदीव, मोरक्को, मोजाम्बीक, म्यामार, नामीबिया, नेपाल, निकारागुआ, निगर, पाकिस्तान, पनामा, पापुआ न्यू गिनी, पराग्वे, पेरू, पोलैंड, कांगो गणराज्य, रोमानिया, समोआ, सेनेगल, सेशल्स, सिएरा लोन, सिंगापुर, स्लोवाकिया, स्लोवानिया, सोमालिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, दक्षिण सूडान, सूरीनाम, श्रीलंका, सेंट किट्स, सेंट लूसिआ, सूडान, तंजानिया, गांबिया, टोगो, त्रिनिदाद व टोबैगो,
एक कार्यकाल : अर्मेनिया, बारबाडोस, बेिल्जयम, बुलगारिया, कोलंबिया, अल सल्वाडोर, फ्रांस, ग्वाटेमाला, होंडुरास, हंगरी, आइसलैंड, आयरलैंड, इजराइल, जमैका, जापान, कोसोवो, किर्गीस्तान, लाओस, लेबनान, मलेशिया, माल्टा, मॉरिशस, मैक्सिको, मोरक्को, पैराग्वे, फिलिपींस, सर्बिया, दक्षिण कोरिया, सेंट लूसिया, तुर्की, उक्रेन
दो कार्यकाल : अमेरिका, अफगानिस्तान, अल्जीरिया, अंगोला, एंटीगुआ, बोस्निया और हर्जेगोविना, बोत्सवाना, ब्राजील, बुरुंडी, कंबोडिया, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कोमोरोस, क्रोएशिया, क्यूबा, चेक गणराज्य, डोमिनिका, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वाडोर, इजिप्ट, एरिट्रिया, फिजी, घाना, गयाना, हैती, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, कजाकस्तान, केन्या, किरिबाती, लाइबेरिया, लिथुआनिया, मैडागास्कर, मलावी, मॉरितानिया, मॉल्दोवा, मोजांबिक, म्यामार, नामीबिया, नाउरू, नेपाल, निगर, नाइजीरिया, फिलिस्तीन, पनामा, पेरू, पोलैंड, कांगो गणराज्य, रोमानिया, रूस, रवांडा, सेनेगल, सेशल्स, सिएरा लियोन, सिंगापुर, स्लोवाकिया, स्लोवानिया, सोमालिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण सूडान, सूडान, सूरीनाम, ताजिकिस्तान, तंजानिया, थाइलैंड, गांबिया, त्रिनिदाद व टोबैगो, तुर्कमेनिस्तान, ट्यूनीशिया, उत्तरी अमेरिका, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, जांबिया, जिंबाब्वे।
Friday, February 15, 2019
印度铁道部长秀快进视频炫国产“高铁”遭嘲讽
火车迷阿布舍克·贾斯瓦尔(Abhishek Jaiswal)随后发布视频原素材。他说原始视频拍摄于去年12月,用于他在Youtube的火车主题频道。
在贾斯瓦尔的原始视频里,同一辆火车的运行速度要慢得多。
而戈亚尔在推特官方账号上发布视频,并配文称赞这是“‘印度制造’计划下建造的印度第一条准高速列车,致敬印度号(Vande Bharat Express)”。
身为印度的铁道部长,戈亚尔掌管着世界上第四大铁路网络。
戈亚尔转发视频中的列车为印度18号列车(Train 18),确实是印度目前速度最快的火车。它将以每小时130公里(80英里)的最高时速往返于首都德里和瓦拉纳西。
作为回应,贾斯瓦尔在推特上发布了他的视频链接,该视频于去年12月20日发布在他的Youtube频道铁路邮件(The Rail Mail)上。视频中的列车运行速度明显慢多了。
贾斯瓦尔称,视频是在印度北部哈里亚纳邦的Asaoti车站拍摄的。
印度新闻网站Alt News随后将两段视频放在一起,方便观众对比观看。
随着对照视频的公开,网友们通过发布他们各自版本的“高速列车”视频来嘲讽铁道部部长。
去年一名香港男子怀疑在台湾杀害女友后返回香港,但因为台湾与香港之间没有司法互助协议,两地政府都无法把他引渡回台湾受审。香港目前有两条与外地引渡嫌疑犯的法例,但条文订明它们不适用于从香港和“中国其他部份之间”(即是指中国大陆、台湾和澳门)引渡嫌疑犯。香港政府日前建议撤消这种规定,并容许香港执法部门取得行政长官许可后,就每一宗个案向法庭申请引渡许可,该建议在香港引起争议。
虽然香港法庭对是否将嫌疑犯引渡有最终决定权,但有人权观察组织始终担心,香港的法庭会不会受到政治的压力,向中国大陆等“人权纪录差劣”的地区移交嫌疑犯。
香港目前与32个司法管辖区签有相互法律协助协定,同时与这些国家其中20个签订移交逃犯协定。香港与这些地区将沿用相关安排,不受新建议影响。
撤销限制
香港目前主要依靠两条法例处理移交逃犯和向其他地方提供司法协助,分别是《刑事事宜相互法律协助条例》和《逃犯条例》。这两条法例分别订明它们不适用于中国大陆、台湾和澳门。换句话说,香港目前没有法律授权可以向这些地方提供法律援助、或引渡嫌疑犯。
去年2月,香港男子陈同佳被指在台湾谋杀女友后返回香港。台湾当局多次透过大陆委员会向香港政府提出请求,希望取得疑犯证供,甚至把他移交到台湾受审。但由于《刑事事宜相互法律协助条例》和《逃犯条例》订明条例不适用于台湾,无法处理台湾的要求,在香港社会引起关注。
另外,香港《东方日报》创办人之一马惜珍,他在1978年因贩毒和涉嫌行贿被香港警方发出拘捕令,因而与家人潜逃台湾,在台湾继续经营公司,直至2015年病逝台湾,终年77岁。
香港政府的建议也适用于澳门。香港商人刘銮雄多年前被澳门法庭裁定行贿澳门前运输工务司长欧文龙罪成,被判监5年3个月,但刘銮雄并不在澳门境内,而港澳也没有引渡逃犯协议,澳门当局无法要求香港引渡刘銮雄到当地坐牢。
而虽然香港一直没有把逃犯移交中国大陆,大陆当局多年来都有单方面按香港要求移交嫌疑犯。其中,三名香港人去年9月持枪抢劫一家钟表店后逃到中国大陆,被广东公安拘捕,并于同年12月移交香港警方。
香港保安局向立法会的文件强调,对嫌疑犯的指控必须在两个司法管辖区同样构成罪行才可引用这两部法例,覆盖范围也只限于谋杀、毒品、性罪行等46项严重罪行,不适用于具政治性质的罪行,有关人士也可以要求对法庭最后的决定提出覆核。
2015年据报被中国拘留的铜锣湾书店店长林荣基接受香港传媒访问时指出,他被中国大陆指控他在香港邮寄大量书借,被指触犯中国大陆“违法经营书籍销售”罪。他说担心会受修例影响,令中国大陆政府有办法把他引渡到当地受审。
虽然修例建议订明不适用于政治罪行,但林荣基认为中国大陆可以配合香港法例以另外的罪行为名,把自己引渡到当地。
香港民主派立法会议员涂谨申认为,香港政府应与台湾政府就陈同佳涉嫌谋杀女友的案件,与台湾当局签订一次性的协议,之后再寻求北京政府同意,与台湾商讨长期的政策。
但建制派议员李慧琼认为,香港社会不应太快批评中国大陆会把政治问题包装成其他罪行提出引渡。她认为,修例后仍然由香港法院决定是否将嫌疑犯引渡,因此香港要对“法治法院有信心,不能因担心而不去想。我们都要相信我们的制度。”
在贾斯瓦尔的原始视频里,同一辆火车的运行速度要慢得多。
而戈亚尔在推特官方账号上发布视频,并配文称赞这是“‘印度制造’计划下建造的印度第一条准高速列车,致敬印度号(Vande Bharat Express)”。
身为印度的铁道部长,戈亚尔掌管着世界上第四大铁路网络。
戈亚尔转发视频中的列车为印度18号列车(Train 18),确实是印度目前速度最快的火车。它将以每小时130公里(80英里)的最高时速往返于首都德里和瓦拉纳西。
作为回应,贾斯瓦尔在推特上发布了他的视频链接,该视频于去年12月20日发布在他的Youtube频道铁路邮件(The Rail Mail)上。视频中的列车运行速度明显慢多了。
贾斯瓦尔称,视频是在印度北部哈里亚纳邦的Asaoti车站拍摄的。
印度新闻网站Alt News随后将两段视频放在一起,方便观众对比观看。
随着对照视频的公开,网友们通过发布他们各自版本的“高速列车”视频来嘲讽铁道部部长。
去年一名香港男子怀疑在台湾杀害女友后返回香港,但因为台湾与香港之间没有司法互助协议,两地政府都无法把他引渡回台湾受审。香港目前有两条与外地引渡嫌疑犯的法例,但条文订明它们不适用于从香港和“中国其他部份之间”(即是指中国大陆、台湾和澳门)引渡嫌疑犯。香港政府日前建议撤消这种规定,并容许香港执法部门取得行政长官许可后,就每一宗个案向法庭申请引渡许可,该建议在香港引起争议。
虽然香港法庭对是否将嫌疑犯引渡有最终决定权,但有人权观察组织始终担心,香港的法庭会不会受到政治的压力,向中国大陆等“人权纪录差劣”的地区移交嫌疑犯。
香港目前与32个司法管辖区签有相互法律协助协定,同时与这些国家其中20个签订移交逃犯协定。香港与这些地区将沿用相关安排,不受新建议影响。
撤销限制
香港目前主要依靠两条法例处理移交逃犯和向其他地方提供司法协助,分别是《刑事事宜相互法律协助条例》和《逃犯条例》。这两条法例分别订明它们不适用于中国大陆、台湾和澳门。换句话说,香港目前没有法律授权可以向这些地方提供法律援助、或引渡嫌疑犯。
去年2月,香港男子陈同佳被指在台湾谋杀女友后返回香港。台湾当局多次透过大陆委员会向香港政府提出请求,希望取得疑犯证供,甚至把他移交到台湾受审。但由于《刑事事宜相互法律协助条例》和《逃犯条例》订明条例不适用于台湾,无法处理台湾的要求,在香港社会引起关注。
另外,香港《东方日报》创办人之一马惜珍,他在1978年因贩毒和涉嫌行贿被香港警方发出拘捕令,因而与家人潜逃台湾,在台湾继续经营公司,直至2015年病逝台湾,终年77岁。
香港政府的建议也适用于澳门。香港商人刘銮雄多年前被澳门法庭裁定行贿澳门前运输工务司长欧文龙罪成,被判监5年3个月,但刘銮雄并不在澳门境内,而港澳也没有引渡逃犯协议,澳门当局无法要求香港引渡刘銮雄到当地坐牢。
而虽然香港一直没有把逃犯移交中国大陆,大陆当局多年来都有单方面按香港要求移交嫌疑犯。其中,三名香港人去年9月持枪抢劫一家钟表店后逃到中国大陆,被广东公安拘捕,并于同年12月移交香港警方。
香港保安局向立法会的文件强调,对嫌疑犯的指控必须在两个司法管辖区同样构成罪行才可引用这两部法例,覆盖范围也只限于谋杀、毒品、性罪行等46项严重罪行,不适用于具政治性质的罪行,有关人士也可以要求对法庭最后的决定提出覆核。
2015年据报被中国拘留的铜锣湾书店店长林荣基接受香港传媒访问时指出,他被中国大陆指控他在香港邮寄大量书借,被指触犯中国大陆“违法经营书籍销售”罪。他说担心会受修例影响,令中国大陆政府有办法把他引渡到当地受审。
虽然修例建议订明不适用于政治罪行,但林荣基认为中国大陆可以配合香港法例以另外的罪行为名,把自己引渡到当地。
香港民主派立法会议员涂谨申认为,香港政府应与台湾政府就陈同佳涉嫌谋杀女友的案件,与台湾当局签订一次性的协议,之后再寻求北京政府同意,与台湾商讨长期的政策。
但建制派议员李慧琼认为,香港社会不应太快批评中国大陆会把政治问题包装成其他罪行提出引渡。她认为,修例后仍然由香港法院决定是否将嫌疑犯引渡,因此香港要对“法治法院有信心,不能因担心而不去想。我们都要相信我们的制度。”
Friday, February 8, 2019
मुजफ्फरनगर दंगाः कवाल केस में 7 दोषियों को मिली उम्रकैद की सजा
5 साल पहले मुजफ्फरनगर में हुए दंगा मामले में स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है. इससे पहले कोर्ट ने कवाल गांव में एक हमले में दो युवकों की हत्या के आरोप में बुधवार को सात लोगों को दोषी ठहराया. बताया जाता है कि इसी हमले के बाद 2013 में मुजफ्फरनगर में दंगा भड़क गया जिसमें 60 से ज्यादा लोग मारे गए थे.
जिला अभियोजक राजीव शर्मा ने बताया कि अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश हिमांशु भटनागर ने 27 अगस्त, 2013 को गौरव और सचिन की हत्या करने तथा दंगे के जुर्म में मुजम्मिल मुज्जसिम, फुरकान, नदीम, जांगीर, अफजल और इकबाल को दोषी करार दिया. सरकारी वकील अंजुम खान ने बताया कि बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुआ. पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पाने के कारण उसको अदालत में पेश किया नहीं जा सका.
मृतक गौरव के पिता रविंद्र कुमार ने 7 लोगों को दोषी ठहराए जाने के बाद कहा कि हमें कोर्ट पर भरोसा था और यह भी पता था कि इसमें कई साल लग जाएंगे. अब देखते हैं कि आगे क्या होता है. केवल हम जानते हैं कि हमने उसे हमेशा के लिए क्या खो दिया. वहीं, गौरव की मां ने 'आजतक' से खास बातचीत में कहा कि आरोपियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने बिना किसी कारण के मेरे बेटे को मार डाला.
प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के मुताबिक, जनसठ थाने के तहत आने वाले कवाल गांव के दो युवकों की हत्या कर दी गई थी. कोर्ट ने अभियोजन के 10 गवाहों और बचाव में उतरे 6 गवाहों की जिरह के बाद 7 लोगों को दोषी ठहराया. अभियोजन वकील द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2013 के दंगे के बाद 6,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए और दंगे में कथित भूमिका के लिए 1,480 संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. मामले की छानबीन करने वाली विशेष जांच टीम ने 175 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया था. इस बीच, 8 फरवरी को सजा का ऐलान होने के बाद आरोपी पक्ष हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है.
मणिकर्णिका को लेकर बॉलीवुड की चुप्पी पर कंगना ने निशाना साधा था. एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने आलिया, आमिर, ट्विंकल को लताड़ा था. उन्होंने कहा था- ''मेरी मूवी की स्क्रीनिंग में कोई सेलेब्रिटी नहीं आता. उनकी बारी आती है तो वे बेशर्म होकर मुझे फोन कर बुलाते हैं. आलिया ने मुझे राजी का ट्रेलर भेजा था और फिल्म को देखने की बात कही थी. ट्रेलर देखने के बाद मैंने मेघना गुलजार और आलिया को फोन किया था. लेकिन मेरी फिल्म के लिए किसी की तरफ से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया. मेरे खिलाफ बड़ा रैकेट चल रहा है.''
8 अगस्त, 2012 को लोकसभा में असम में घुसपैठ और राज्य में बड़े पैमाने पर होने वाली जातीय हिंसा को लेकर स्थगन प्रस्ताव पर बहस चल रही थी. तब बीजेपी की तरफ से इस बहस का नेतृत्व बीजेपी के 'लौह पुरुष' लालकृष्ण आडवाणी ने ही किया था. उस दिन संसद में खूब हंगामा हुआ था और इस स्थगन प्रस्ताव पर मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की हालत खराब हो गई थी. ट्रेजरी बेंच की तरफ से लगातर बाधा डालने के बावजूद लालकृष्ण आडवाणी लगातार बोलते रहे और जो कुछ कहना चाहते थे कह कर रहे. दशकों लंबी बेहतरीन राजनीतिक पारी खेलने वाले आडवाणी के लिए यह कोई नई बात नहीं थी. उस अकेले एक दिन के आडवाणी के भाषण में 4,957 शब्द शामिल थे. उनके इस भाषण में 50 बार व्यवधान डालने की कोशिश की गई.
अब बात 8 जनवरी, 2019 की. इस दिन भी लोकसभा में एक और हंगामेदार दिन था. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने सदन में नागरिकता संशोधन बिल रखा था. यह बिल संसद में पारित हुआ तो इसका असम के सामाजिक-राजनीतिक जीवन पर गहरा असर होगा. जिस दिन लोकसभा में यह बिल पेश हुआ, बहस हुई, आडवाणी सदन में मौजूद थे. लेकिन इतना महत्वपूर्ण बिल होने के बावजूद उन्होंने एक शब्द नहीं बोला.
यानी इन दस सालों में बीजेपी के 'लौह पुरुष' आडवाणी के लिए दुनिया पूरी तरह से बदल गई. कई वेबसाइट्स पर सांसदों के कामकाज का लेखा-जोखा मौजूद होता है. इनसे यह पता चलता है कि पिछले पांच साल में आडवाणी ने सिर्फ 365 शब्द बोले हैं. इसकी पिछली यानी 15वीं लोकसभा के दौरान आडवाणी 42 बार बहसों और अन्य कार्यवाहियों में हिस्सा लिया और करीब 35,926 शब्द बोले थे.
यह वही आडवाणी हैं जिनकी जीवनी 'माय कंट्री, माय लाइफ' में 1,000 पेज हैं. अपने खराब स्वास्थ्य की वजह से (वह 91 साल के हैं) लालकृष्ण आडवाणी भले ही सार्वजनिक तौर पर कम दिखते हों, लेकिन नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान संसद में उनकी उपस्थिति जबर्दस्त रही है. संसद के कामकाज के दिनों उनकी उपस्थिति 92 फीसदी तक रही, जो अन्य सांसदों के मुकाबले बहुत अच्छा है.
सामने आए नए तथ्य और विपक्ष के आरोपों के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में सरकार की तरफ से सफाई दी. रक्षा मंत्री ने कहा कि राफेल मामले पर सभी आरोपों को खारिज किया जा चुका है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के सामने है. लिहाजा, विपक्ष सिर्फ गड़े मुर्दे उखाड़ने का काम कर रहा है.
जिला अभियोजक राजीव शर्मा ने बताया कि अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश हिमांशु भटनागर ने 27 अगस्त, 2013 को गौरव और सचिन की हत्या करने तथा दंगे के जुर्म में मुजम्मिल मुज्जसिम, फुरकान, नदीम, जांगीर, अफजल और इकबाल को दोषी करार दिया. सरकारी वकील अंजुम खान ने बताया कि बुलंदशहर जेल में बंद मुजम्मिल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुआ. पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पाने के कारण उसको अदालत में पेश किया नहीं जा सका.
मृतक गौरव के पिता रविंद्र कुमार ने 7 लोगों को दोषी ठहराए जाने के बाद कहा कि हमें कोर्ट पर भरोसा था और यह भी पता था कि इसमें कई साल लग जाएंगे. अब देखते हैं कि आगे क्या होता है. केवल हम जानते हैं कि हमने उसे हमेशा के लिए क्या खो दिया. वहीं, गौरव की मां ने 'आजतक' से खास बातचीत में कहा कि आरोपियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने बिना किसी कारण के मेरे बेटे को मार डाला.
प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के मुताबिक, जनसठ थाने के तहत आने वाले कवाल गांव के दो युवकों की हत्या कर दी गई थी. कोर्ट ने अभियोजन के 10 गवाहों और बचाव में उतरे 6 गवाहों की जिरह के बाद 7 लोगों को दोषी ठहराया. अभियोजन वकील द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2013 के दंगे के बाद 6,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए और दंगे में कथित भूमिका के लिए 1,480 संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. मामले की छानबीन करने वाली विशेष जांच टीम ने 175 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया था. इस बीच, 8 फरवरी को सजा का ऐलान होने के बाद आरोपी पक्ष हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है.
मणिकर्णिका को लेकर बॉलीवुड की चुप्पी पर कंगना ने निशाना साधा था. एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने आलिया, आमिर, ट्विंकल को लताड़ा था. उन्होंने कहा था- ''मेरी मूवी की स्क्रीनिंग में कोई सेलेब्रिटी नहीं आता. उनकी बारी आती है तो वे बेशर्म होकर मुझे फोन कर बुलाते हैं. आलिया ने मुझे राजी का ट्रेलर भेजा था और फिल्म को देखने की बात कही थी. ट्रेलर देखने के बाद मैंने मेघना गुलजार और आलिया को फोन किया था. लेकिन मेरी फिल्म के लिए किसी की तरफ से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया. मेरे खिलाफ बड़ा रैकेट चल रहा है.''
8 अगस्त, 2012 को लोकसभा में असम में घुसपैठ और राज्य में बड़े पैमाने पर होने वाली जातीय हिंसा को लेकर स्थगन प्रस्ताव पर बहस चल रही थी. तब बीजेपी की तरफ से इस बहस का नेतृत्व बीजेपी के 'लौह पुरुष' लालकृष्ण आडवाणी ने ही किया था. उस दिन संसद में खूब हंगामा हुआ था और इस स्थगन प्रस्ताव पर मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की हालत खराब हो गई थी. ट्रेजरी बेंच की तरफ से लगातर बाधा डालने के बावजूद लालकृष्ण आडवाणी लगातार बोलते रहे और जो कुछ कहना चाहते थे कह कर रहे. दशकों लंबी बेहतरीन राजनीतिक पारी खेलने वाले आडवाणी के लिए यह कोई नई बात नहीं थी. उस अकेले एक दिन के आडवाणी के भाषण में 4,957 शब्द शामिल थे. उनके इस भाषण में 50 बार व्यवधान डालने की कोशिश की गई.
अब बात 8 जनवरी, 2019 की. इस दिन भी लोकसभा में एक और हंगामेदार दिन था. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने सदन में नागरिकता संशोधन बिल रखा था. यह बिल संसद में पारित हुआ तो इसका असम के सामाजिक-राजनीतिक जीवन पर गहरा असर होगा. जिस दिन लोकसभा में यह बिल पेश हुआ, बहस हुई, आडवाणी सदन में मौजूद थे. लेकिन इतना महत्वपूर्ण बिल होने के बावजूद उन्होंने एक शब्द नहीं बोला.
यानी इन दस सालों में बीजेपी के 'लौह पुरुष' आडवाणी के लिए दुनिया पूरी तरह से बदल गई. कई वेबसाइट्स पर सांसदों के कामकाज का लेखा-जोखा मौजूद होता है. इनसे यह पता चलता है कि पिछले पांच साल में आडवाणी ने सिर्फ 365 शब्द बोले हैं. इसकी पिछली यानी 15वीं लोकसभा के दौरान आडवाणी 42 बार बहसों और अन्य कार्यवाहियों में हिस्सा लिया और करीब 35,926 शब्द बोले थे.
यह वही आडवाणी हैं जिनकी जीवनी 'माय कंट्री, माय लाइफ' में 1,000 पेज हैं. अपने खराब स्वास्थ्य की वजह से (वह 91 साल के हैं) लालकृष्ण आडवाणी भले ही सार्वजनिक तौर पर कम दिखते हों, लेकिन नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान संसद में उनकी उपस्थिति जबर्दस्त रही है. संसद के कामकाज के दिनों उनकी उपस्थिति 92 फीसदी तक रही, जो अन्य सांसदों के मुकाबले बहुत अच्छा है.
सामने आए नए तथ्य और विपक्ष के आरोपों के बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में सरकार की तरफ से सफाई दी. रक्षा मंत्री ने कहा कि राफेल मामले पर सभी आरोपों को खारिज किया जा चुका है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के सामने है. लिहाजा, विपक्ष सिर्फ गड़े मुर्दे उखाड़ने का काम कर रहा है.
Friday, January 18, 2019
द क्वीन ऑफ झांसी से करणी सेना नाराज, तोड़फोड़ की धमकी
Karni Sena protest against Kangana Ranaut film Manikarnika पद्मावत की रिलीज के समय चर्चा में आई करणी सेना एक साल बाद फिर जाग गई है. अबकी बार राजपूत संगठन के निशाने पर कंगना रनौत की रानी लक्ष्मीबाई पर आधारित फिल्म मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी है. गुरुवार को करणी सेना ने फिल्म की रिलीज का विरोध किया. उन्हें रानी लक्ष्मीबाई के ब्रिटिश अफसर संग रिलेशन पर आपत्ति है. उनका दावा है कि मूवी में रानी लक्ष्मीबाई को एक गाने पर डांस करते दिखाया गया है, जो सभ्यता के खिलाफ है.
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह शेखावत ने मिड डे से बातचीत में कहा, ''बार बार हमने देखा है कि फिल्ममेकर्स किसी उद्देश्य के साथ खास सीन्स को दिखाने की स्वतंत्रता लेते हैं. ये सब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हमने इस बारे में पिछले साल फरवरी में भी चिंता जाहिर की थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी, हमने पद्मावत को कई राज्यों में रिलीज नहीं होने दिया था.''
खदेव सिंह ने कहा, ''कंगना रनौत की मणिकर्णिका भी ऐसे ही अंजाम भुगतेगी. हमने निर्माताओं से बात कर कहा कि वे हमें रिलीज से पहले फिल्म दिखाए. अगर वे हमें दिखाए बिना मूवी रिलीज कर देते हैं तो हम प्रॉपर्टी तोड़ेंगे और इसके उत्तदायी हम नहीं होंगे. सुखदेव सिंह का कहना है कि उन्हें CBFC की क्लीयरेंस से कोई मतलब नहीं है. उन्होंने कहा- उन्हें फिल्म इतिहासकारों को दिखानी चाहिए ताकि वे फैक्ट्स को चैक किया जा सके.''
मालूम हो कि करणी सेना ने दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह-शाहिद कपूर स्टारर मूवी पद्मावत का खूब विरोध किया था. आरोप था कि फिल्म में रानी पद्मावती का गलत चित्रण किया गया है. अलाउद्दीन खिलजी और पद्मावती के बीच रोमांटिक सीन्स फिल्माए गए हैं. डायरेक्टक संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट और सेट पर तोड़फोड़ की गई थी.
दीपिका और भंसाली को जान से मारने की धमकी तक दी गई. मेकर्स ने कई बार दावा किया कि मूवी में रानी पद्मावती के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाया गया है. लेकिन फिल्म रिलीज तक करणी सेना ने कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी रखा. मामला कोर्ट तक भी पहुंचा.
उन्होंने कहा कि गुजरात के निर्माण का विकास चीन के साथ मेल खाता है. कुमार मंगलम बिड़ला ने गुजरात में तीन साल में 15,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश स्टेपल फाइबर और रसायन, फिलामेंट, कास्टिक सोडा, तांबा और उर्वरक, खनन और खनिज, सौर ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में होगा.
वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल सम्मेलन को लेकर एक पोस्टर तैयार किया गया है. तैयार किए गए पोस्टरों में नितिन पटेल दिखाई नहीं दिए. इन पोस्टरों में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, अहमदाबाद के मेयर बिजल पटेल, उद्योग एवं ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल, राजस्व मंत्री कौशिक पटेल, गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जडेजा की तस्वीर है, लेकिन नितिन पटेल की तस्वीर नहीं है.
इससे पहले पीएम मोदी जब गुरुवार को अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उतरे, राज्यपाल ओ.पी. कोहली, अहमदाबाद के मेयर बिजल पटेल ने उनका स्वागत किया. सम्मेलन के लिए अन्य मंत्रियों और बीजेपी नेताओं की तस्वीर इन पोस्टरों में है, यहां तक की प्रदेश पार्टी अध्यक्ष जितूभाई वघानी की भी तस्वीर है, लेकिन नितिन पटेल की तस्वीर नदारद है.
बता दें कि उपमुख्यमंत्री ने तब हंगामा खड़ा कर दिया था, जब उन्हें विभाग प्रभार के फेरबदल में वित्त विभाग नहीं दिया गया था. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद ही पटेल को वित्त विभाग का कार्यभार दिया जा सका.
इससे पहले जब आनंदीबेन पटेल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, वह रूपाणी के साथ मुख्यमंत्री पद की रेस में आगे चल रहे थे. यहां तक कि उन्होंने टीवी चैनलों पर साक्षात्कार भी देना शुरू कर दिया था, हालांकि शाह के इशारे पर उन्हें अंतिम समय में मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया.
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह शेखावत ने मिड डे से बातचीत में कहा, ''बार बार हमने देखा है कि फिल्ममेकर्स किसी उद्देश्य के साथ खास सीन्स को दिखाने की स्वतंत्रता लेते हैं. ये सब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हमने इस बारे में पिछले साल फरवरी में भी चिंता जाहिर की थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी, हमने पद्मावत को कई राज्यों में रिलीज नहीं होने दिया था.''
खदेव सिंह ने कहा, ''कंगना रनौत की मणिकर्णिका भी ऐसे ही अंजाम भुगतेगी. हमने निर्माताओं से बात कर कहा कि वे हमें रिलीज से पहले फिल्म दिखाए. अगर वे हमें दिखाए बिना मूवी रिलीज कर देते हैं तो हम प्रॉपर्टी तोड़ेंगे और इसके उत्तदायी हम नहीं होंगे. सुखदेव सिंह का कहना है कि उन्हें CBFC की क्लीयरेंस से कोई मतलब नहीं है. उन्होंने कहा- उन्हें फिल्म इतिहासकारों को दिखानी चाहिए ताकि वे फैक्ट्स को चैक किया जा सके.''
मालूम हो कि करणी सेना ने दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह-शाहिद कपूर स्टारर मूवी पद्मावत का खूब विरोध किया था. आरोप था कि फिल्म में रानी पद्मावती का गलत चित्रण किया गया है. अलाउद्दीन खिलजी और पद्मावती के बीच रोमांटिक सीन्स फिल्माए गए हैं. डायरेक्टक संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट और सेट पर तोड़फोड़ की गई थी.
दीपिका और भंसाली को जान से मारने की धमकी तक दी गई. मेकर्स ने कई बार दावा किया कि मूवी में रानी पद्मावती के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाया गया है. लेकिन फिल्म रिलीज तक करणी सेना ने कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी रखा. मामला कोर्ट तक भी पहुंचा.
उन्होंने कहा कि गुजरात के निर्माण का विकास चीन के साथ मेल खाता है. कुमार मंगलम बिड़ला ने गुजरात में तीन साल में 15,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश स्टेपल फाइबर और रसायन, फिलामेंट, कास्टिक सोडा, तांबा और उर्वरक, खनन और खनिज, सौर ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में होगा.
वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल सम्मेलन को लेकर एक पोस्टर तैयार किया गया है. तैयार किए गए पोस्टरों में नितिन पटेल दिखाई नहीं दिए. इन पोस्टरों में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, अहमदाबाद के मेयर बिजल पटेल, उद्योग एवं ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल, राजस्व मंत्री कौशिक पटेल, गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जडेजा की तस्वीर है, लेकिन नितिन पटेल की तस्वीर नहीं है.
इससे पहले पीएम मोदी जब गुरुवार को अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उतरे, राज्यपाल ओ.पी. कोहली, अहमदाबाद के मेयर बिजल पटेल ने उनका स्वागत किया. सम्मेलन के लिए अन्य मंत्रियों और बीजेपी नेताओं की तस्वीर इन पोस्टरों में है, यहां तक की प्रदेश पार्टी अध्यक्ष जितूभाई वघानी की भी तस्वीर है, लेकिन नितिन पटेल की तस्वीर नदारद है.
बता दें कि उपमुख्यमंत्री ने तब हंगामा खड़ा कर दिया था, जब उन्हें विभाग प्रभार के फेरबदल में वित्त विभाग नहीं दिया गया था. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद ही पटेल को वित्त विभाग का कार्यभार दिया जा सका.
इससे पहले जब आनंदीबेन पटेल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, वह रूपाणी के साथ मुख्यमंत्री पद की रेस में आगे चल रहे थे. यहां तक कि उन्होंने टीवी चैनलों पर साक्षात्कार भी देना शुरू कर दिया था, हालांकि शाह के इशारे पर उन्हें अंतिम समय में मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया.
Thursday, January 10, 2019
इस नई बॉलीवुड एक्ट्रेस के साथ काम करना चाहते हैं इमरान हाशमी
एक्टर इमरान हाशमी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म चीट इंडिया के प्रमोशन में बिजी हैं. वो फिल्म को प्रोड्यूस भी कर रहे हैं. प्रमोशन के दौरान इमरान ने एक इंटरव्यू में बताया कि वो किस नई एक्ट्रेस के साथ काम करना चाहते हैं. स्पॉटबॉय से बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि वो किस नई एक्ट्रेस के साथ काम करना चाहेंगे तो उन्होंने सारा अली खान का नाम लिया.
उन्होंने कहा, मैंने अभी तक सारा की दोनों फिल्में नहीं देखी हैं. लेकिन मेरे दोस्त और घरवालों ने सारा की फिल्म देखी है. उन्होंने सारा के काम की बहुत तारीफ की है. इसी वजह से मैं इस टैलेंट के साथ भविष्य में काम करना चाहता हूं.' बता दें, चीट इंडिया की रिलीज डेट को शिफ्ट कर दिया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के मेकर्स ने इसे तय रिलीज डेट से एक हफ्ता पहले रिलीज करने की सोची है.
पहले ये फिल्म भी 25 जनवरी को ही रिलीज होने वाली थी. मगर अब इसे 18 जनवरी 2019 को रिलीज किया जाएगा.
साल 2019 के पहले महीने में बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं. एक तरफ कंगना रनौत की फिल्म मणिकर्णिका रिलीज के लिए तैयार है. दूसरी तरफ, महाराष्ट्र के बड़े नेता बालसाहेब ठाकरे के जीवन पर बनी फिल्म भी इसी के आसपास रिलीज की जाएगी. दोनों रिपब्लिक डे के खास मौके पर रिलीज हो रही हैं. इसी कारण इमरान हाशमी की फिल्म चीट इंडिया को पहले रिलीज करने का फैसला लिया गया है.
फिल्म का निर्देशन गुलाबी गैंग के डायरेक्टर शौमिक सेन ने किया है. फिल्म से श्रेया धनवंतरी बॉलीवुड डेब्यू कर रही हैं. कास्टिंग में कई सारे ऑडिशन्स के बाद 40 थियेटर एक्टर्स को शामिल किया गया है.
वहीं सारा अली खान के वर्क फ्रंट की बात करें तो सारा ने फिल्म केदारनाथ से बॉलीवुड में डेब्यू किया. फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत उनके अपोजिट रोल में थे. मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की थी. सिम्बा ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
इस साल दिग्गज एक्टर अंबरीश (Ambareesh) के निधन की वजह से यश ने बर्थडे सेलिब्रेट नहीं किया था. जिसकी वजह से एक्टर अपने जबरा फैन से नहीं मिल पाया. सुसाइड के बारे में पता चलने के बाद यश अस्पताल गए थे. उन्होंने रवि के परिवारवालों को सांत्वना दी.
इस दुखद घटना पर बोलते हुए यश ने कहा- ''रवि ने मेरे जन्मदिन पर मेरे साथ सेल्फी खिंचवाई थीं. मुझे कहते हुए खेद है लेकिन ये फैंडम नहीं है. मैं नहीं मानता कि वो फैन हो सकता है. मैं अपने फैन से अपील करता हूं कि ऐसा कदम ना उठाएं. मैंने जन्मदिन से कुछ दिन पहले वीडिया जारी कर कहा भी था कि मैं इस साल बर्थडे सेलिब्रेट नहीं कर रहा हूं. ये बहुत दुखद है.''
अस्पताल के बर्न वार्ड के HOD डॉक्टर केटी कमलेश ने रवि से हुई आखिरी बातचीत के बारे में बताया. उन्होंने कहा- ''रवि आखिरी बार भी यश के बारे में ही बात कर रहा था. जब हम उसके जख्मों की ड्रेसिंग कर रहे थे तो रवि ने पूछा क्या यश मुझसे मिलने आएंगे?''
उन्होंने कहा, मैंने अभी तक सारा की दोनों फिल्में नहीं देखी हैं. लेकिन मेरे दोस्त और घरवालों ने सारा की फिल्म देखी है. उन्होंने सारा के काम की बहुत तारीफ की है. इसी वजह से मैं इस टैलेंट के साथ भविष्य में काम करना चाहता हूं.' बता दें, चीट इंडिया की रिलीज डेट को शिफ्ट कर दिया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के मेकर्स ने इसे तय रिलीज डेट से एक हफ्ता पहले रिलीज करने की सोची है.
पहले ये फिल्म भी 25 जनवरी को ही रिलीज होने वाली थी. मगर अब इसे 18 जनवरी 2019 को रिलीज किया जाएगा.
साल 2019 के पहले महीने में बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं. एक तरफ कंगना रनौत की फिल्म मणिकर्णिका रिलीज के लिए तैयार है. दूसरी तरफ, महाराष्ट्र के बड़े नेता बालसाहेब ठाकरे के जीवन पर बनी फिल्म भी इसी के आसपास रिलीज की जाएगी. दोनों रिपब्लिक डे के खास मौके पर रिलीज हो रही हैं. इसी कारण इमरान हाशमी की फिल्म चीट इंडिया को पहले रिलीज करने का फैसला लिया गया है.
फिल्म का निर्देशन गुलाबी गैंग के डायरेक्टर शौमिक सेन ने किया है. फिल्म से श्रेया धनवंतरी बॉलीवुड डेब्यू कर रही हैं. कास्टिंग में कई सारे ऑडिशन्स के बाद 40 थियेटर एक्टर्स को शामिल किया गया है.
वहीं सारा अली खान के वर्क फ्रंट की बात करें तो सारा ने फिल्म केदारनाथ से बॉलीवुड में डेब्यू किया. फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत उनके अपोजिट रोल में थे. मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की थी. सिम्बा ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
इस साल दिग्गज एक्टर अंबरीश (Ambareesh) के निधन की वजह से यश ने बर्थडे सेलिब्रेट नहीं किया था. जिसकी वजह से एक्टर अपने जबरा फैन से नहीं मिल पाया. सुसाइड के बारे में पता चलने के बाद यश अस्पताल गए थे. उन्होंने रवि के परिवारवालों को सांत्वना दी.
इस दुखद घटना पर बोलते हुए यश ने कहा- ''रवि ने मेरे जन्मदिन पर मेरे साथ सेल्फी खिंचवाई थीं. मुझे कहते हुए खेद है लेकिन ये फैंडम नहीं है. मैं नहीं मानता कि वो फैन हो सकता है. मैं अपने फैन से अपील करता हूं कि ऐसा कदम ना उठाएं. मैंने जन्मदिन से कुछ दिन पहले वीडिया जारी कर कहा भी था कि मैं इस साल बर्थडे सेलिब्रेट नहीं कर रहा हूं. ये बहुत दुखद है.''
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