Friday, January 18, 2019

द क्वीन ऑफ झांसी से करणी सेना नाराज, तोड़फोड़ की धमकी

Karni Sena protest against Kangana Ranaut film Manikarnika पद्मावत की रिलीज के समय चर्चा में आई करणी सेना एक साल बाद फिर जाग गई है. अबकी बार राजपूत संगठन के निशाने पर कंगना रनौत की रानी लक्ष्मीबाई पर आधारित फिल्म मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी है. गुरुवार को करणी सेना ने फिल्म की रिलीज का विरोध किया. उन्हें रानी लक्ष्मीबाई के ब्रिटिश अफसर संग रिलेशन पर आपत्ति है. उनका दावा है कि मूवी में रानी लक्ष्मीबाई को एक गाने पर डांस करते दिखाया गया है, जो सभ्यता के खिलाफ है.

करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह शेखावत ने मिड डे से बातचीत में कहा, ''बार बार हमने देखा है कि फिल्ममेकर्स किसी उद्देश्य के साथ खास सीन्स को दिखाने की स्वतंत्रता लेते हैं. ये सब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हमने इस बारे में पिछले साल फरवरी में भी चिंता जाहिर की थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी, हमने पद्मावत को कई राज्यों में रिलीज नहीं होने दिया था.''

खदेव सिंह ने कहा, ''कंगना रनौत की मणिकर्णिका भी ऐसे ही अंजाम भुगतेगी. हमने निर्माताओं से बात कर कहा कि वे हमें रिलीज से पहले फिल्म दिखाए. अगर वे हमें दिखाए बिना मूवी रिलीज कर देते हैं तो हम प्रॉपर्टी तोड़ेंगे और इसके उत्तदायी हम नहीं होंगे. सुखदेव सिंह का कहना है कि उन्हें CBFC की क्लीयरेंस से कोई मतलब नहीं है. उन्होंने कहा- उन्हें फिल्म इतिहासकारों को दिखानी चाहिए ताकि वे फैक्ट्स को चैक किया जा सके.''

मालूम हो कि करणी सेना ने दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह-शाहिद कपूर स्टारर मूवी पद्मावत का खूब विरोध किया था. आरोप था कि फिल्म में रानी पद्मावती का गलत चित्रण किया गया है. अलाउद्दीन खिलजी और पद्मावती के बीच रोमांटिक सीन्स फिल्माए गए हैं. डायरेक्टक संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट और सेट पर तोड़फोड़ की गई थी.

दीपिका और भंसाली को जान से मारने की धमकी तक दी गई. मेकर्स ने कई बार दावा किया कि मूवी में रानी पद्मावती के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाया गया है. लेकिन फिल्म रिलीज तक करणी सेना ने कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी रखा. मामला कोर्ट तक भी पहुंचा. 

उन्होंने कहा कि गुजरात के निर्माण का विकास चीन के साथ मेल खाता है. कुमार मंगलम बिड़ला ने गुजरात में तीन साल में 15,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश स्टेपल फाइबर और रसायन, फिलामेंट, कास्टिक सोडा, तांबा और उर्वरक, खनन और खनिज, सौर ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में होगा.

वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल सम्मेलन को लेकर एक पोस्टर तैयार किया गया है. तैयार किए गए पोस्टरों में नितिन पटेल दिखाई नहीं दिए. इन पोस्टरों में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, अहमदाबाद के मेयर बिजल पटेल, उद्योग एवं ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल, राजस्व मंत्री कौशिक पटेल, गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जडेजा की तस्वीर है, लेकिन नितिन पटेल की तस्वीर नहीं है.

इससे पहले पीएम मोदी जब गुरुवार को अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उतरे, राज्यपाल ओ.पी. कोहली, अहमदाबाद के मेयर बिजल पटेल ने उनका स्वागत किया. सम्मेलन के लिए अन्य मंत्रियों और बीजेपी नेताओं की तस्वीर इन पोस्टरों में है, यहां तक की प्रदेश पार्टी अध्यक्ष जितूभाई वघानी की भी तस्वीर है, लेकिन नितिन पटेल की तस्वीर नदारद है.

बता दें कि उपमुख्यमंत्री ने तब हंगामा खड़ा कर दिया था, जब उन्हें विभाग प्रभार के फेरबदल में वित्त विभाग नहीं दिया गया था. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद ही पटेल को वित्त विभाग का कार्यभार दिया जा सका.

इससे पहले जब आनंदीबेन पटेल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, वह रूपाणी के साथ मुख्यमंत्री पद की रेस में आगे चल रहे थे. यहां तक कि उन्होंने टीवी चैनलों पर साक्षात्कार भी देना शुरू कर दिया था, हालांकि शाह के इशारे पर उन्हें अंतिम समय में मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया.

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